वो सरहद के प्रहरी हैं, भारत की शान हैं,
धूप हो या तूफ़ां, हमेशा मैदान में जान हैं।
धरती मां के लाल हैं, सीना तान खड़े,
दुश्मन की हर साजिश को, बनकर दीवार खड़े।
मां, बहन, पत्नी, बच्चे—सबसे किया किनारा,
बस उनका एक ही सपना, भारत मां का बने सहारा।
हर बर्फीली चोटी पर, हर तपते रेगिस्तान में,
तिरंगा लहराए ऊंचा, हर मस्जिद, मंदिर, गुरूदारो में।
जय हिंद का नारा, उनके होंठों की मुस्कान है,
उनकी हर सांस में , देशभक्ति की पहचान है।
सलाम है उन वीरों को , जिनसे जीवन हमारा रोशन है,
वो हैं ढाल हमारी , वो हमारी धड़कन हैं।
वो सरहद के प्रहरी हैं, भारत की शान हैं,
धूप हो या तूफ़ां, हमेशा मैदान में जान हैं।
- आवल्या
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